Monday, September 30, 2019

कम्प्युटर कीबोर्ड क्या है और कीबोर्ड के प्रकार

कम्प्युटर कीबोर्ड क्या है ( keyboard in hindi )

की - बोर्ड लगभग टाइपराइटर के सामान ही होता है , फर्क सिर्फ इतना है कि टाइपराइटर में लगे बटनों की अपेक्षा की - बोर्ड के बटन आसानी से दबते हैं जिससे लम्बे समय तक कार्य करने में सुविधा रहती है । की - बोर्ड के बटनों में एक खास बात यह भी होती है कि किसी बटन को कुछ देर तक दबाए रखा जाये तो  वह स्वयं को repeats होता है ।
 की - बोर्ड एक केबल के द्वारा कम्प्यूटर से जुड़ा होता है जिसका एक सिरा की - बोर्ड तथा दूसरा सिरा CPU के पीछे लगे एक सॉकेट में लगाया जाता है । टाइपराइटर की तुलना में की - बोर्ड में कई अधिक Keys होती हैं , जिनसे अनेक प्रकार के काम किये जाते है। की -  बोर्ड के सबसे ऊपर right side ओर तीन रोशनी देने वाली light लगी होती हैं । ये Caps Lock , Num Lock तथा Scroll Lock key की स्थिति दर्शाते रहते हैं ।
Keyboard in hindi

की - बोर्ड ( कुंजीपटल ) user के निर्देशों / आदेशों अथवा डाटा / सूचना को कम्प्यूटर में input कराने का महत्वपूर्ण माध्यम है तथा सर्वाधिक प्रचलित है इसके द्वारा सूचना / डाटा सेन्ट्रल प्रोसेसिंग यूनिट को भेजा जाता है । Caps Lock / Num Lock / Scroll Lock को On / Off करने वाली कीज को Toggle Keys कहा जाता है , और Ctrl / Alt Keys को Combination Key कहा जाता है ।

मुख्य की - बोर्ड :-

यह एक साधारण अंग्रेजी टाइपराइटर के की - बोर्ड जैसा होता है । इसमें रोमन लिपि के सभी अक्षर , अंक कुछ विशेष चिह्न , विराम चिह्न तथा दो शिफ्ट कुंजीयाँ होती है । मुख्य की - बोर्ड लगभग सभी की - बोर्डो में एक जैसा ही होता है ।

● ऐस्केप - की ( ESC ) : -

ESC  Key, keyboard के ऊपरी बाएँ कोने पर स्थित है । इस keys का प्रयोग तुरन्त दिये गये आदेश को समाप्त करने में होता है। कम्प्यूटर पर काम करते समय मौजूदा प्रोग्राम में अचानक खुली हुई ( प्रोग्राम ) प्रक्रिया को रद्द करने के काम में भी ली जाती है , या पॉप अप विंडोज को बंद करने के लिए एक कुंजी है।

● फंक्शन कीज ( Function Keys ) : -

इन बटनों पर F1 से F12 तक नाम लिखे होते हैं । यह हर प्रोग्राम में अलग - अलग कार्य करती हैं ।
Function keys

☆ F1(help):- कम्प्यूटर पर काम करते समय हमें मदद की आवश्यकता होती है । जिस प्रोग्राम में हम काम कर रहे है उससे सम्बन्धित मदद के विंडोज डेस्कटॉप पर दिखाई देती है ।
☆F2 (raname) :- कम्प्युटर पर इस keys की सहायता से किसी भी फोल्डर एवं फाइल का नाम बदल सकते है जिसके लिए उस फाइल एवं फोल्डर पर जाकर इस कुंजी को दबाएँ एवं नाम टाईप करके बाहर क्लिक करें ।
☆F3 (search) :- कम्प्यूटर पर इस keys की सहायता से किसी भी फोल्डर , फाइल , चित्र आदि को खोजने के लिए काम में किया जाता है । इसको दबाने से डेस्कटॉप पर एक सर्च विंडो खुल जाती है ।
☆F4 ( internet Explorer) :- कम्प्यूटर पर इस keys की सहायता इंटरनेट एक्सप्लोर में एड्रस बार खुल जाएगी । और AIt के साथ F4 दबाने से चालू प्रोग्राम बंद हो जाएगा ।
☆F5 ( Refresh ) :- कम्प्यूटर को इस keys की सहायता से ताजा ( Refresh ) कर सकते है और वेब पेज को दुबारा लोड कर सकते है ।
☆F6 : - वर्ड में काम करते समय इस कुंजी को दो बार दबाने से मेनू बार सक्रिय हो जाती है ।
☆F7 : - वर्ड में काम करते समय व्याकरण से सम्बन्धि गलती को सुधारने के लिए इस keys की सहायता ली जाती है ।
☆F8 : - कम्प्यूटर में विंडो लोड करते समय इस  keys को दबाकर बूट प्रक्रिया चालू की जा सकती है । और वर्ड में इसकी सहायता से सलेक्शन को बढ़ाया जा सकता है ।
☆F9: वर्ड में इस keys की सहायता से सलेक्सन को हटाया जाता है और यह बूट प्रक्रिया चालू करने के काम में भी ली जाती है।
☆F10 :- कम्प्यूटर पर इस keys की सहायता प्रोग्राम की मेन बार को सक्रिय करने के काम में ली जाती है । और Shift के साथ F10 दबाने से डेस्कटॉप पर Right Click का कार्य करता है ।
☆F11 (full view ):- इंटरनेट एक्सप्लोर में काम करते समय इस keys की सहायता से इंटरनेट एक्सप्लोर को फुल स्क्रीन पर देखा जा सकता है।
☆F12 (save as): - वर्ड में कार्य करते समय इस कुंजी की सहायता से Save as विंडो खुल जाती है । और फाईल को सेव कर सकते हैं ।
Note: - फंक्शन कुंजीयों का उपयोग ज्यादा टेली के अन्दर कार्य करते समय किया जाता है। 

● संख्यात्मक की - पैड ( Numeric Keypad ) : -

Keyboard के Left side में कैलकुलेटर जैसा एक keys का समूह होता है । इसमें 0 से 9 तक सभी अंक दशमलव बिन्दु , + , - , * ,/, . Keys भी होते है । कुछ बटनों पर अंक के नीचे कुछ और भी छपा होता है ।
Note: -  इस की - पैड से संख्याएँ टाइप करने के लिए हमें संख्यात्मक लॉक ( NUM LOCK ) बटन को ऑन ( ON ) करना होता है । तो इस की - पैड की कीज से उन पर ऊपर लिखे अंक  टाइप होते है । और यदि ऑफ ( OFF ) हो , तो उन बटनों पर नीचे लिखे हुए कार्य होते है ।     

● कर्सर मूवमेन्ट कीज ( Cursor Control Keys ) :- 

इन ऐरो Key का प्रयोग कर्सर ( मॉनीटर पर चमकती एक रेखा ) को दाएं , बाएं , ऊपर , तथा नीचे चलाने में कााम करते हैं । इसके अलावा चार और keys होती हैं , जो Home , End , Page Up तथा Page Down । ये keys कर्सर को टेक्स्ट पर घुमाने में सहायक होती हैं । Home और End key कर्सर को टेक्स्ट के प्रारम्भ तथा अन्त में रखने का कार्य करती हैं । Page Up keys से किसी दस्तावेज या फाइल के पिछे के पेज पर ले जाती है ।

● विशेष उद्देश्य कीज ( Special Purpose Keys ) :-

बैकस्पेस - की Backspace - बैकस्पेस की उन अक्षरों या चिन्हों को हटाती है , जो कर्सर के right side होते हैं ।

● कैप्स लॉक - की ( Caps Lock Key ) : -

यह एक विशेष key है । जब आप पहली बार इसे दबाते हैं , तो सारे अक्षर बड़े रूप में लिखे जायेंगे ( छोटा a बड़े A में लिखा जायेगा । ) अगर आपने फिर Caps Lock Key को दबाया तो सारे अक्षर छोटे अक्षर ( Upper Case ) में टाइप हो जायेंगे । यदि आप टेक्स्ट को बड़े अक्षर में लिखना चाहते हैं , तो आप Cpas lock keys  को दबा सकते हैं ।

Note: - कैप्स लॉक , नम लॉक और स्क्रोल लॉक जैसे फिचर को ऑन और ऑफ करने वाली कीज को टॉगल कीज कहा जाता है। 

● शिफ्ट - की ( Shift Key ) : -

शिफ्ट - की को दबाए रखकर किसी अक्षर को टाइप किया जाए तो वह बड़े अक्षरों में आता है । लेकिन कैप्स लॉक - की ऑफ होनी चाहिए - जब कैप्स लॉक - की ऑन होगी तो शिफ्ट - की का प्रभाव उलटा हो जाता है । यानी शिफ्ट - की के साथ कोई अक्षर टाइप करने पर छोटे अक्षर आते है । जिन कीज पर दो चिह्न लिखे होते हैं , उन्हें शिफ्ट के बिना दबाने पर नीचे लिखा चिह्न आता है और शिफ्ट के साथ दबाने पर ऊपर लिखा चिह्न टाइप होता है । 
उदाहरण के लिए , न्यूमेरिक keys के मामले में आप प्रत्येक बटन पर दो अक्षर पाते हैं । इस प्रकार Shift की को - दबाने पर न्यूमेरिक keys के ऊपर के चिन्ह , जैसे - ~ ! @ # . $ % ^ & * ( ) इत्यादि स्क्रीन पर दिखाई देते हैं । 
ऐसे बटनों पर कैप्स लॉक - की का कोई प्रभाव नहीं होता है।

● टैब - की ( Tab Key ) : -

टैब को दबाकर आप कर्सर को पूर्व निर्धारित 5 या अधिक स्पेस ( अपनी आवश्यकता के अनुसार ) आगे बढ़ा सकते हैं । Tab की टेबल में टेक्स्ट को टाइप करने में मदद करती है । इसका कार्य भी टाइपराइटर के टैब बटन की तरह ही है जिसका प्रयोग आप सारणी टाइप करने में करते हैं ।

● एन्टर - की या रिटर्न - की ( Enter ) : -

Enter कम्प्यूटर को आदेश देने के काम में आता है अर्थात् कम्प्यूटर को दिये गये आदेश को चलाने में होता है । 
वर्ड प्रोसेसिंग प्रोग्रामों में रिर्टन या एन्टर दबाते ही आप अगली रेखा पर पहुँच जाते हैं । कीबोर्ड की एन्टर की को . रिटर्न - की भी कहते हैं । इसका प्रयोग रेखा या पैराग्राफ के अन्त को इंगित करने में होता है।
● स्पेशबार : -  दो शब्दों के बीच में जगह छोड़ने के लिए ।

● इनसर्ट - की ( Insert ) : -

Ins - " Ins ” इनसर्ट ( Insert ) का संक्षिप्त रूप है । यह Ins की इनसर्ट और ओवरस्ट्राइक ( Overstrike ) दोनों तरह से कार्य करती है । Word Pad में इनसर्ट की को पहली बार दबाकर अक्षर या प्रतीक को टाइप करते हैं , तो नया टाइप किया हुआ टेक्स्ट पहले से लिखे हुए टेक्स्ट को दाहिने तरफ बढ़ाता है । इसे इनसर्ट टेक्स्ट मोड कहते हैं । यदि आप इनसर्ट बटन को पुनः दबाकर टाइप करते हैं , तो नया टाइप किया हुआ टेक्सट , पहले से टाइप हुए टेक्स्ट के ऊपर लिखा जायेगा अथवा उसे हटा देगा । इसे ओवर स्ट्राइक कहते हैं । जब आप ओवर स्ट्राइक मोड में टाइप करते हैं , तो नया टेक्स्ट पुराने टेक्स्ट के ऊपर लिखा जाता है।

● डिलीट - की ( Delete Key ) : -

इस बटन को दबाकर आप कर्सर के ठीक दायीं ओर के अक्षर को हटा सकते हैं । कर्सर जहाँ भी हो वहाँ के अक्षर को आप हटा सकते है । डिलीट बटन का कार्य बैकस्पेस बटन से भिन्न होता है। बैकस्पेस बटन कर्सर के बायीं तरफ के अक्षर को हटाता है , जबकि डिलीट बटन कर्सर के दायी ओर के अक्षर को हटाता है।

● प्रिन्ट स्क्रीन - की ( Print Screen Key ) : -

जब हम इस बटन को दबाते है तो कम्प्यूटर की स्क्रीन पर जो भी प्रोग्राम एवं टेक्स्ट दिखाई देता है उसकी कॉपी हो जाती है और उसको हम किसी भी प्रोग्राम जैसे - पेंट , वर्ड , आदि में पेस्ट कर सकते हैं और उसका प्रिन्ट निकाल सकते हैं।

● कुंजियों का संयोजन ( Multi - Key Combination ) : -

मल्टी - की संयोजन एक या एक से अधिक बटनों का संयोजन है। जिन्हें आप एक ही समय में एक साथ दबाते हैं । जैसे - आपको Computers लिखना है , तो आप Shift बटन को दबाकर C टाइप करेंगे तो बड़े अक्षर का C लिखा जायेगा । कन्ट्रोल बटन Ctrl अथवा अल्टर बटन Alt का प्रयोग इस संयोजन में अधिक होता है । Ctrl कन्टोल का , और Alt अल्टरनेटिव का संक्षिप्त रूप है । इस प्रकार Ctrl + C को चलाने के लिए आपको Ctrl बटन के साथ अक्षर C को भी दबाना होगा । यह कार्य , चलने वाले प्रोग्राम पर निर्भर करता है । जैसे - Ctrl + Alt + Del इन तीनों बटनों को एक साथ दबाने से आपका कम्प्यूटर दोबारा स्टार्ट या बूट हो जायेगा।

● की - बोर्ड की विशेषताएँ ( Key - Board Features):-

कम्प्यूटर के keyboard में टाइपराइटर की - बोर्ड के साथ न्यूमेरिक कीपैड होते है , जिसका उपयोग संख्याओं और गणितीय चिन्हों को टाइप करने के लिए किया जाता है । कैप्सलॉक जैसे कुछ बटनों को टॉगल की कहते है - बटन Ctrl , Alt जैसे अन्य बटनों को कॉम्बिनेशन - की कहते है और यह किसी अन्य की बटन के साथ मिलकर काम करता है।

●  की - बोर्ड के प्रकार (Key-board types) : - 

Keyboard की डिजाइन की विभिन्न श्रेणियाँ हैं । जिसमें सामान्य प्रकार निम्नलिखित हैं-

☆ परम्परागत की - बोर्ड : -

ये पूर्ण आकार का कठोर चतुर्भुज की - बोर्ड होता है , जिसमें निश्चित बटन होते हैं ।

☆ फ्लेक्सिबल की - बोर्ड :-

इस key board को आसानी से पैकिंग एवं स्टोरेज के लिए मोड़ा या घुमाया जा सकता है ।

☆ डरगोनोमिक की - बोर्ड :-

इन keyboard को विशेष रूप से नसों के तनाव एवं उनसे संबंधित समस्याओं को कम करने के लिए डिजाइन किया गया है । इसका आकार परम्परागत keyboard से थोड़ा अलग है और हथेली को आराम प्रदान करता है ।

☆ वायरलेस की - बोर्ड :-

ये keyboard इनपुट को सिस्टम यूनिट में हवा के द्वारा भेजता है । ये अधिक लचीला और सुविधाजनक होता है , क्योंकि ये तारों से जुड़े नहीं होते हैं ।

☆ पीडीए की - बोर्डः  -

 ये पीडीए ( हैंडहेल्ड कम्प्यूटर का एक प्रकार ) के लिए सूक्ष्म आकार का keyboard है और इसका उपयोग अनेक कार्यों जैसे ई - मेल भेजने एवं डॉक्यूमेंट तैयार करने के लिए किया जा सकता है।

Sunday, September 1, 2019

Cathod Ray Tube

Cathod Ray Tube in hindi

CRT का पूरा नाम  Cathod Ray Tube  होता है , यह मॉनीटर का प्राथमिक अवयव है । इसमें कैथोड होता है , जिससे इलैक्टॉन्स उत्सर्जित होते हैं । heat को कैथोड के अन्दर भेजा जाता है , इसके लिए coil या तार का प्रयोग किया जाता है । जैसे ही हीट कैथोड के पास पहुंच जाती है , वह इलैक्ट्रॉन्स को उत्सर्जित करता है । इन इलैक्ट्रॉन्स को beam भी कहा जाता है । यह फास्फोरस coated स्क्रीन पर टकराती हैं , तथा स्क्रीन के नेगेटिव सिग्नल्स को पॉजिटिव अर्थात् धनात्मक कर देती है ।
Cathod Ray Tube (CRT)

 क्या आप जानते हो CRT क्या होता हैै? आज में आपको CRT के बारे में बाताओगा । कैथोड मे से इलेक्ट्रॉन्स उत्सर्जित होते हैं . इस कारण इसे इलैक्ट्रॉन गन भी कहते है । इलेक्ट्रॉन गन से निकलने के बाद ये deflection सिस्टम तथा focus सिस्टम से होकर गुजरते हैं , तथा ये सिस्टम इलैक्ट्रॉन beam को फास्फोरस coated स्क्रीन के निर्धारित बिन्द पर केन्द्रित करता हैं , तथा जहां - जहां इलेक्ट्रान beam टकराती है वहां - वहां सूक्ष्म बिन्दु के रूप में प्रकाश उत्पन्न होता है । यह प्रकाश बहुत अधिक तीव्रता से कम होता है , picture को लगातार प्रदर्शित करने के लिए फास्फोरस बिन्दुओं पर प्रकाश को निरन्तर बनाए रखने के लिए picture को बार - बार बनाया जाता है । इसलिए इस प्रकार के डिस्प्ले को refresh CRT भी कहा जाता है । 
CRT इलैक्ट्रॉन गन के मुख्य दो भाग कैथोड तथा कन्ट्रोल ग्रिड होते हैं । कैथोड का आकार खाली बेलन के समान होता है , इसके द्वारा कैथोड पर heat भी भेजी जाती है , जिससे कैथोड गर्म होकर इलैक्ट्रॉन उत्सर्जित करता है , जो कि स्क्रीन की तरफ गति करते हैं । इन इलैक्ट्रॉन्स की गति के लिए high positive voltage ( उच्च धनात्मक वॉल्टेज ) का उपयोग किया जाता है , इसे  फोटो की सहायता से समझा जा सकता है-
cathode ray tube (crt)

beam की intensity (तीव्रता) को नियंत्रित करने के लिए कन्ट्रोल ग्रिड पर वॉल्टेज लेवल को सैट किया जाता है , यह कन्ट्रोल ग्रिड धातु का बना होता है , जिसका आकार बेलन नुमा होता है , जो कि कैथोड ट्यूब के ऊपर लगा होता है इसके द्वारा वॉल्टेज में परिवर्तन कर स्क्रीन पर प्रदर्शित होने वाली आकृति की चमक को नियंत्रित किया जाता है । इसका प्रयोग प्राय : टेलीविज़न तथा कम्प्यूटर ग्राफिक्स मॉनीटर में किया जाता है । इस विधि में electronic beam को धनात्मक आवेश वाले एक खोखले बेलन से गुजारा जाता है , यह एक लैंस की भांति कार्य करता है जो कि इलैक्ट्रॉन बीम को स्क्रीन के मध्य बिन्दु पर फोकस करता है । जब इलैक्ट्रॉन स्क्रीन से टकराते हैं तो स्क्रीन पर लगे फास्फोरस के द्वारा उनकी गतिज ऊर्जा को अवशोषित किया जाता है , तथा कुछ ऊर्जा को फास्फोरस परमाणु के इलैक्ट्रॉन ग्रहण करते हैं । जब इलैक्ट्रॉन सामान्य अवस्था से उत्तेजित अवस्था में आते हैं तो प्रकाश की तीव्रता बढ़ती है तथा इलैक्ट्रॉन के सामान्य अवस्था में आते ही प्रकाश की तीव्रता कम होती है ।
cathode ray tube (crt)

CRT की गुणवत्ता उसके रिज़ोल्यूशन पर निर्भर होती है । रिज़ोल्यूशन को सामान्यतः DPI ( dots per inch ) में मापा जाता है । यह माप horizontal तथा vertical को मिलाकर की जाती है । उच्च गुणवत्ता वाला रिजोल्यूशन 1280 x 1024 होता है ।

Color CRT (Cathod Ray Tube) Monitor:-

 Color CRT monitor picture को display करने के लिये फास्फोरस का प्रयोग करता है जो कि विभिन्न रंगीन lights को उत्पन्न करता है । CRT में रंगों को जनरेट करने के लिये दो तकनीकों का प्रयोग किया जाता है।
Output device CRT monitor

( 1 ) Beam penetration Method 
( 2 ) Shadow Mask Method

( 1 ) Beam Penetration Method : -

इस तकनीक का प्रयोग random scan monitor में किया जाता है । इस तकनीक में CRT के आन्तरिक भाग में फास्फोरस की दो परतों को लगाया जाता है जो कि लाल व हरे रंग वाले फास्फोरस की होती हैं । इस तकनीक के द्वारा जनरेट किए गए रंग इस बात पर निर्भर करते हैं कि इलैक्ट्रॉन बीम ने फास्फोरस की परत को कितने अन्दर तक भेदा है । अधिक गति वाली बीम ऊपर परत जो लाल रंग की होती है , उसको भेदकर अन्दर लगी हरी परत को उत्तेजित करती है , जिससे हरा रंग उत्पन्न होता है ।
( 1 ) Beam Penetration Method :
धीमी इलैक्ट्रॉन बीम केवल ऊपर परत जो कि लाल होती है उसको उत्तेजित करती है , तथा उससे लाल रंग उत्पन्न होता है । मध्यम गति वाली इलैक्ट्रॉन बीम लाल व हरी दोनों रंगों की परतों को उत्तेजित करती है जिससे पीला व नारंगी रंगी उत्पन्न होते हैं । जरनेट किए गए रंग इलैक्टॉन बीम की गति पर निर्भर करते हैं तथा  इलक्ट्रॉन बीम की गति acceleration voltage पर निर्भर करती हैं ।

( 2 ) Shadow Mask Method :-

 raster scan system में इस विधि का प्रयोग किया जाता है । क्योंकि यह कई अत्यधिक range में color जरनेट करता है । इस तरह के CRT में तीन तरह के color फास्फोरस बिन्दु ( dots ) pixel पर लगे होते हैं।
 ( 1 ) Red color 
( 2 ) Green color 
( 3 ) Blue color 
इस तरह के Monitor में तीन electron guns होती हैं । पहली gun सभी color dots के लिये होती हैं । दूसरी gun phosphor के पीछे shadow mask आकृति बनाने के लिये होती है , जिसे हम डेल्टा shadow mask method कहते हैं तथा तीसरी gun shadow को ग्रुप करके एक image screen पर display करती है ।
( 2 ) Shadow Mask Method : CRT
इस विधि में shadow mask grid को स्क्रीन के पीछे रखा जाता है , जिसमें प्रत्येक पिक्सल के लिए एक छिद्र होता है । तीनों electroni beams को focus व deflect करके उसे गंतव्य पिक्सल के सामने वाले छिद्र पर डाला जाता है । तीनों beams इस छिद्र से गुजरने के बाद एक dot triangle को activate करती हैं जो कि स्क्रीन पर एक छोट से बिन्दु के रूप में प्रदर्शित होता है । इन बिन्दुओं को इस प्रकार व्यवस्थित किया जाता है कि प्रत्येक इलैक्ट्रॉन बीम केवल उसके similar रंग वाले बिन्दु को ही क्रियाशील करे । electron gun के वॉल्टेज को नियंत्रित करके विभिन्न रंग उत्पन्न किए जाते हैं । 
Color graphic System का मुख्यत : उपयोग कई तरह के display device के साथ किया जाता है । मुख्यत : इसका use computer system , video games , color t . v . तथा R . E . modulator में किया जाता है । 
Graphics system में color CRT को RGB मॉनीटर बनाया जाता है । ये मॉनीटर्स shadow mask method का प्रयोग करते हैं । ये प्रत्येक electron gun के लिए intensity level सीधे कम्प्यूटर सिस्टम से लेते हैं ।




Tuesday, August 27, 2019

स्कैनर क्या है ? What is scanner

स्कैनर क्या है ? / Scanner definition :-

यह एक ऐसा उपकरण है जो टैक्स्ट या पिक्चर की प्रतिलिपी बनाकर उसे कम्प्यूटर में स्टोर करता है । यह एक Input device है जो कि हार्ड कॉपी इमेजेस की सॉफ्टकॉपी बनाकर उन्हें कम्प्यूटर में स्टोर किया जाता है । इसमें अलग अलग क्वालिटी के स्केनर होते है जो कि अलग - अलग रिजोल्यूशन के होते हैं । वर्तमान काल में scanner का प्रयोग बढ़ता ही जा रहा है । इसके द्वारा स्कैन की इमेज को इमेज प्रोसेसिंग सॉफ्टवेयर के माध्यम से इमेज में आवश्यक manipulations की जा सकती हैं या इमेज का आकार कम या ज्यादा किया जा सकता है । ग्राफिक scanner अर्थात् इमेज scanner इमेजेस व टैक्स्ट डॉक्यूमेन्टस को इमेज रूप में ही स्कैन करता है ।
Computer input device scanner
यह कागज , दस्तावेज या फोटोग्राफ इत्यादि को इलेक्ट्रॉनिक रूप पर परिवर्ति कर देता है जो कि कम्प्यूटर में स्टोर किया जाता है । यह इलैक्ट्रॉनिक रूप एक इमेज की भांति होता है , जिसमें आवश्यकता के अनुसार editing , manipulation इत्यादि किए जा सकते हैं । यह कार्य इमेज प्रोसेसिंग Software के माध्यम से किया जाता है । scanner अलग - अलग आकार व अलग - अलग तकनीक के होते हैं।
सामान्यतः तकनीक के आधार पर स्कैनर दो प्रकार के होते हैं-
1. Mono Scanner 
2. Color Scanner

1. Mono Scanner:-

इस प्रकार के scanner के द्वारा black & white प्रतिलिपियों , दस्तावेजों या फोटोग्राफ को स्कैन किया जाता है । यह स्कैन black & white system में 256 shade स्कैन कर सकता हैं।
Computer input device scanner

2. Color Scanner:-

इस तरह के scanner के द्वारा रंगीन इमेजेस ग्राफ फोटोग्राफ व दस्तावज का आसानी से स्कैन किया जा सकता है । इस प्रकार के scanner के द्वारा टक्स्ट प्रोसेसिंग भी जा सकती है । सामान्य color scanner के द्वारा 1024 प्रकार के रंगों के शेड उत्पन्न किए जा सकते हैं । आजकल इमेज प्रोसेसिंग के लिए इन्हीं  scanners का प्रयोग किया जाता है ।
Input device of computer scanner


आकार के आधार पर स्कैनर दो प्रकार के होते हैं-
1. Handy Scanner
2. Flatbed Scanner

1. Handy Scanner:-

Handy scanner में light emitting diode का सैट होता है जो कि एक छोटे से आवरण में होता है जिससे उसे आसानी से हाथ में पकड़ा जा सकता है । इस प्रकार के scanner का प्रयोग बहुत ही छोटे दस्तावेजों , फोटोग्राफ व drawing को स्कैन करने के लिए किया जाता है । ये स्कैनर मोटरयुक्त या सामान्य भी होते हैं । मोटरयुक्त स्कैनर स्वयं ही इमेज को स्कैन करके कम्प्यूटर में स्टोर कर देते हैं , इन्हें हाथ से चलाने की आवश्यकता नहीं पड़ती । परन्तु सामान्य scanners को इमेज के ऊपर एक सिरे से दूसरे सिरे तक हाथ से चलाना पड़ता तो ही ये इमेज को स्कैन कर पाते हैं।
Input device of computer scanner

2. Flatbed scanner:-

यह scanner  एक बॉक्स की भांति होता है जो ऊपर से समतल होता है । इसमें ऊपरी हिस्से पर कांच की प्लेट लगी होती है । कांच की प्लेट को ढकने के लिए एक कवर होता है । जो भी दस्तावेज या इमेज स्कैन की जानी है उसे कांच की प्लेट के ऊपर उल्टा करके रखा जाता है , कुछ ही सैकण्ड्स में वह डॉक्यूमेन्ट स्कैन हो जाता है । इस प्रकार के scanner के द्वारा A4 के आकार के उससे छोटे आकार के कागज , दस्तावेज , इमेज या फोटोग्राफ आदि को डालकर स्कैन कर सकते हैं । इस प्रकार के scanner  के चार भाग ( i ) Scan Card , ( ii ) Scanner , ( iii ) cable & connector , ( iv ) Scanning Software होते हैं । scanner कार्ड को मदरबोर्ड के द्वारा जोड़ा जाता है , तथा केबल व कनैक्टर द्वारा स्कैनर को स्कैन कार्ड से जोड़ते हैं । उसके पश्चात् स्कैनिंग सॉफ्टवेयर को प्रारम्भ करते हैं , यदि स्कैनिंग सॉफ्टवेयर ना हो तो उसे install करेंगे । इस प्रकार इन स्कैनर्स के द्वारा इमेजेस को स्कैन किया जा सकता है ।

Thursday, August 22, 2019

प्लॉटर क्या हैं और उसके प्रकार

प्लॉटर क्या हैं? ( plotter meaning in hindi)

प्लॉटर एक Output device है। plotter के द्वारा Drawing, Chart, Graph आदि को प्रिंट किया जाता हैं। ये 3D photo Printing भी करते हैं ये पोस्टर को print करता हैं।
जिसका प्रयोग बड़ी ड्राइंग या चित्र जैसे कि कंस्ट्रक्शन प्लान्स ( Construction Plans ) , मैकेनिकल वस्तुओं की ब्लूप्रिंट , AUTOCAD , CAD / CAM आदि के लिए करते हैं । इसमें ड्रॉइंग बनाने के लिए पेन , पेन्सिल , मार्कर आदि राइटिंग टूल का प्रयोग होता है । यह Printers की तरह होता है । इसमें एक समतल चौकोर सतह पर कागज लगाया जाता है । इस सतह से कुछ ऊपर एक ऐसी छड़ होती है , जो कागज के एक सिरे से दूसरे सिरे तक चल सकती है । इस छड़ पर अलग - अलग रंगों के दो या तीन पेन लगे होते हैं , जो छड़ पर आगे - पिछे सरक सकते हैं । इस प्रकार छड़ और पेनों की सम्मिलित हलचल से समतल सतह के किसी भी भाग में कागज पर चिह्न या चित्र बनाया जा सकता है । इसके द्वारा छपाई अच्छी होती है , परन्तु ये बहुत धीमे होते हैं तथा मूल्य भी अपेक्षाकृत अधिक होता है । प्रिंट करने में  वैसे तो इस कार्य के लिए सामान्य प्रिन्ट्स को भी इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन इनकी सहायता से सभी चित्रों को उच्च कोटि की शुद्धता से प्राप्त किया जाता है।
Output device plotter


प्लॉटर दो प्रकार ( types of plotter)

(i) ड्रम प्लॉटर (Drum Plotter) 
(ii) फ्लैट बैड (Flat Bad)

( 1 ) ड्रम प्लॉटर ( Drum Plotter ) -

 इसमें आगे पीछे घूमने वाला एक ड्रम होता है । जिस पर कागज लगा दिया जाता है और एक इलेक्ट्रॉनिक हाथ ( Electronic Hand ) की सहायता से उस पर डिजाइन बनाई जाती है । इसकी सहायता से काफी बड़े आकार के चित्र प्राप्त किये जा सकते है ।
Output device plotter

( ii ) फ्लैट बैड ( Flat Bad ) -

इन plotters पर कागज एक समतल सतह पर लगा रहता है । तथा प्लॉटर चित्र बनाने के लिए सरकता रहता है । इससे छोटे आकार के चित्र प्राप्त किये जा सकते है ।
Output device printer

Note:- लेजर प्रिंटरों के आ जाने के बाद इनका प्रयोग लगभग समाप्त हो गया है।


Tuesday, August 20, 2019

प्रिंटर क्या हैं और उसके प्रकार

प्रिंटर क्या हैं? (What is Printer)

प्रिंटर क्या हैं और उसके प्रकार

Printer एक प्रकार का Output device  होता है । इसका प्रयोग कम्प्यूटर से प्राप्त डेटा और सूचना को किसी कागज पर प्रिंट करने के लिए करते हैं । यह ब्लैक और वाइट के साथ - साथ कलर डॉक्यूमेंट को भी प्रिंट कर सकते है । किसी भी printer की क्वालिटी उसकी प्रिंटिग की क्वालिटी पर निर्भर करती है अर्थात् जितनी अच्छी प्रिंटिंग क्वालिटी होगी , Printer उतना ही अच्छा माना जाएगा । किसी printer की गति कैरेक्टर प्रति सेकण्ड ( Character per secound - CPS ) में , लाइन प्रति मिनट ( Line per minute - LPM ) में और मेजेज प्रति मिनट (Pages per minute-PPM) में मापी जाती है।
कम्प्युटर हम printer मुख्यत: दो भागों में बांट सकते हैं।
1 Impact Printers
2 Non-Impact Printers

प्रोग्रामिंग भाषा
कंप्यूटर क्या हैं?
Operating system
Management information system (MIS)
Relational database management system (RDBMS)

1 Impact Printers :-

Impact Printer एक बार में एक कैरेक्टर या एक लाइन प्रिण्ट कर सकता है । इस प्रकार के printer  ज्यादा अच्छी क्वालिटी की प्रिंटिंग नहीं करते हैं । ये printer ओर printers की तुलना में सस्ते होते हैं और प्रिंटिंग के दौरान आवाज अधिक करते हैं , इसलिए इनका प्रयोग कम होता है।
Impact printer तीन प्रकार के होते हैं -
1 Dot matrix printer
2 Daisy wheel printer
3 Line printer

1 डॉट मैट्रिक्स प्रिंटर्स ( Dot Matrix Printers ) : -

डॉट मैट्रिक्स प्रिंटर में पिनों की एक पंक्ति होती है जो कागज के ऊपरी सिरे पर रिबन पर प्रहार करते हैं । जब पिन रिबन पर प्रहार करते है तो डॉट्स का एक समूह एक मैट्रिक्स के रूप में कागज पर पड़ता है , जिससे अक्षर या चित्र छप जाते है । इस प्रकार के प्रिंटर को पिन प्रिंटर भी कहते हैं । डॉट मैट्रिक्स प्रिंटर एक बार में एक ही कैरेक्टर प्रिंण्ट करता है । यह अक्षर या चित्र को डॉट्स के पैटर्न में प्रिंट करते हैं । अर्थात् कोई कैरेक्टर या चित्र बहुत सारे डॉट्स को मिलाकर प्रिंट किए जाते हैं । ये काफी धीमी गति से प्रिंट करते हैं तथा ज्यादा आवाज करते हैं , जिससे इसे कम्प्यूटर के साथ कम प्रयोग करते हैं । कुछ प्रिन्टर्स में 9 पिनों की 11 पंक्तियाँ होती हैं तथा ओर में 24 पिन होती हैं । पिनों की संख्या जितनी अधिक होगी प्रिन्ट की गुणवत्ता उतनी ही अच्छी होती है । ये प्रिन्टर्स दो आकार में उपलब्ध होते हैं - 80 कॉलम तथा 132 कॉलम। इन प्रिन्टर्स की गति 100 अक्षर प्रति सैकण्ड से लेकर 1200 अक्षर प्रति सैकण्ड होती है ।
इस तरह के Printers में Epson HP, LAPT, TVSE आदि है।
Printer output device

2  डेजी व्हील प्रिंटर्स ( Daisy wheel Printers ) : -

डेजी व्हील प्रिंटर्स में कैरेक्टर की छपाई टाइपराइटर की तरह होती है । यह डॉट मैट्रिक्स प्रिंटर की अपेक्षा अधिक रिजोल्यूशन की प्रिंटिंग करता है तथा इसका आउटपुट , डॉट मैट्रिक्स प्रिंटर की अपेक्षा ज्यादा विश्वसनीय ( Reliable ) होता है । इस प्रिन्टर में प्रिन्ट करने के लिए प्लास्टिक की बनी एक गोल डिस्क होती है जिसका आकार डैजी के फूल जैसा होता है । इसलिए यह डैजी व्हील कहलाता है , इसका व्यास लगभग 65 मिलीमीटर होता है तथा इसमें अनेक पंखुड़ियाँ होती है।
Output device printer

3 लाइन प्रिंटर्स ( Line Printers ) : -

इस प्रकार के प्रिंटर के द्वारा एक बार में पूरी एक लाइन प्रिंट होती है । ये भी एक प्रकार के इम्पैक्ट प्रिंटर होते जो कागज पर दाब डालकर एक बार में पूरी एक लाइन प्रिंट करते हैं , इसलिए इन्हें लाइन प्रिंट कहते हैं । इनकी प्रिंटिंग की क्वालिटी ज्यादा अच्छी नहीं होती है , लेकिन प्रिंटिंग की गति काफ़ी तेज होती है ।लाइन प्रिंटर (Line Printer) दो प्रकार के होते हैं।
● चैन प्रिन्टर ( Chain Printer ) 
● ड्रम प्रिन्टर ( Drum Printer )
● चेन प्रिंटर (Chain Printer):-
 इन प्रिन्टर्स में एक धातु की बनी हुई चैन होती है । जो एक निश्चित गति से घूमती है ।पूरी चैन पर संख्याओं , अक्षरों तथा विशेष चिन्हों के समूह 5 बार बने होते हैं। इसमें प्रिंट स्थानों की संख्या के बराबर उनके सामने की ओर छोटी-छोटी हथौडिया होती है।
Output device printer
● ड्रम प्रिन्टर ( Drum Printer ):-
 ये एक प्रकार के लाइन प्रिंटर होते है , जिसमें एक बेलनाकार ड्रम ( Cylindrical Drum ) लगातार घूमता रहता है । इस ड्रम में अक्षर उभरे हुए होते हैं । ड्रम और कागज के बीच में एक स्याही से लगी हुई रिबन होती है । जिस स्थान पर अक्षर छापना होता है , उस स्थान पर हैमर कागज के साथ - साथ रिबन पर प्रहार करता है । रिबन पर प्रहार होने से रिबन ड्रम में लगे अक्षर पर दबाव डालता है , जिससे अक्षर कागज पर छप जाता है ।
Output device printer




2 Non-Impact Printers:-

ये printer कागज पर प्रहार नहीं करते , बल्कि अक्षर या चित्र प्रिट करने के लिए स्याही की फुहार कागज पर छोड़ते हैं । नॉन इम्पैक्ट printer प्रिंटिंग में  इंकजेट तकनीकी का प्रयोग करते हैं । इसके द्वारा उच्च क्वालिटी के ग्राफिक्स और अच्छे अक्षरों को छापता है । ये printer , impact printer से महँगे होते हैं , किन्तु इनकी छपाई Impact printer की अपेक्षा ज्यादा अच्छी होती है ।
Non-Impact Printer के प्रकार निम्न है-
1 Inkjet printer
2 Thermal printer
3 Laser printer
4 Elector magnetic printer
5 Elector static printer

1 इंकजेट प्रिंटर्स ( Inkjet Printers ) : -

इंकजेट प्रिंटर में कागज पर स्याही की फुहार द्वारा छोटे - छोटे बिन्दु डालकर छपाई की जाती है । इनकी छपाई की गति 1 से 4 पेज प्रति मिनट होती है । इनकी छपाई की गुणवत्ता भी अच्छी होती है । ये विभिन्न प्रकार के रंगों द्वारा अक्षर और चित्र छाप सकते हैं । इन प्रिंटरों में छपाई के लिए A4 आकार के पेपर का प्रयोग करते हैं । इंकजेट प्रिंटर में रीबन के स्थान पर गीली स्याही से भरा हुआ कार्टिज ( Cartridge ) लगाया जाता है । यह कार्टिज एक जोड़े के रूप में होता है । एक में काली ( Black ) स्याही भरी जाती है । तथा दूसरे में मैजेण्टा ( Magents ) , पीली ( Yellow ) और सियान रंग ( Green - Bluish ) की स्याहा भरी जाती है । कार्टिज ही इस प्रिंटर का हेड होता है । कागज पर स्याही की फुहार छोड़कर छपाई करता है । इंकजेट प्रिंटर को प्रायः समानान्तर पोर्ट के माध्य से कम्प्यूटर से जाड़ा जाता है । वैसे आजकल USB पोर्ट वाले इंकजेट प्रयोग किए जाते हैं । इसमें रोज एक या दो पेज प्रिंट करना चाहिए , जिससे इसका कार्टिज गीला रहता है और बेकार नहीं होता है ।
Output device printer

2 थर्मल प्रिंटर्स ( Thermal Printers ) : -

यह पेपर पर अक्षर छापने के लिए ऊष्मा का प्रयोग करता है । ऊष्मा के द्वारा स्याही को पिघलाकर कागज पर छोड़ते हैं , जिससे अक्षर या चित्र छपते हैं । फैक्स मशीन भी एक प्रकार का थर्मल प्रिंटर है । यह अन्य प्रिंटर की अपेक्षा धीमा और महँगा होता है और इसमें प्रयोग करने के लिए एक विशेष प्रकार के पेपर की आवश्यकता पड़ती है जो केमिकली ट्रीटेड पेपर होता है ।
Output device printer

3 लेजर प्रिंटर्स ( Laser Printers ) : -

लेजर प्रिंटर के द्वारा उच्च गुणवत्ता ( Quality ) के अक्षर और चित्र छापे जाते हैं । ये विभिन्न प्रकार के और विभिन्न स्टाइल के अक्षर को छाप सकते हैं ।
इन प्रिंटरों की तकनीक फोटोकॉपी मशीनों के समान होती है । इसमें कम्प्यूटर से भेजा गया डेटा लेजर किरणों की सहायता से इसके ड्रम पर चार्ज उत्पन्न कर देता है । इसमें एक टोनर होता है जो चार्ज के कारण ड्रम पर चिपक जाता है । जब यह ड्रम घूमता है और इसके नीचे से कागज निकलता है , तो टोनर कागज पर अक्षरों या चित्रों का निर्माण करता है । ये प्रिंटर अपनी क्षमता के अनुसार , 1 इंच में 300 से 1200 बिन्दुओं की सघनता द्वारा छपाई कर सकते हैं । ये एक मिनट में 5 से 24 पेज तक छाप सकते हैं । ये इम्पैक्ट प्रिंटर से ज्यादा महँगे होते हैं । 
Output device printer

4 इलेक्टो मैग्नेटिक प्रिंटर्स ( Elector Magnetic Printers ) : -

इलेक्ट्रो मैग्नेटिक प्रिंटर या इलेक्ट्रो फोटोग्राफिक प्रिंटर बहुत तेज गति से छपाई करते हैं । ये प्रिंटर्स पेज प्रिंटर ( जो एक बार में पूरा जेज प्रिंट करते हों ) की श्रेणी में आते | हैं । ये प्रिंटर किसी डॉक्यूमेंट में एक मिनट के अन्दर 20 , 000 लाइनें प्रिंट कर सकते हैं अर्थात् 250 पेज प्रति मिनट की दर | से छपाई कर सकते हैं । इसका विकास पेपर कॉपियर तकनीक के माध्यम से किया गया था।
Output device printer

5 इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रिंटर्स ( Elector StaticPrinters ) :-

इस प्रिंटर का प्रयोग सामान्यतः बड़े फॉर्मेट की प्रिंटिंग के लिए किया जाता है । इसका प्रयोग ज्यादातर बड़े प्रिंटिंग प्रेस में किया जाता है , क्योंकि इनकी गति काफी तेज होती है तथा प्रिंट करने में खर्च कम आता है ।
Output device printer






Friday, August 9, 2019

आउटपुट डिवाइस क्या हैं और इसके प्रकार

आउटपुट डिवाइस क्या हैं ( What is output devices? )

क्या आप जानते हैं की Output device का मतलब क्या होता है 
आउटपुट ( output ) का मतलब हैै  out का मतलब बाहर, और PUT का मतलब रखना होता है । Device में हम output को देखते हैं। अर्थात् Output device एक ऐसा डिवाइस है जिसमें हम कंप्यूटर में डाटा के रिजल्ट को देख सकते हैं मूल रूप से कहा जाए तो आउटपुट डिवाइस को हम विद्युत यंत्र यानी ( Electrical device) भी कहते हैं। जो Digital data को कंप्यूटर से प्राप्त करता है और उसे हमारे पास समझ में आने वाली भाषा में स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करता है। कंप्यूटर में आउटपुट 0 और 1 के form में देता है जिसे हम Machine language  बोलते हैं मॉनिटर और स्पीकर ऐसे आउटपुट डिवाइस है जिसे व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाता है।इन दोनों डिवाइस में हमें तुरंत प्रतिक्रिया प्राप्त होती है
 जैसे मॉनिटर में हमने जो भी शब्द हम लिखते हैं या इनपुट करते हैं उसे मॉनिटर अपने स्क्रीन पर आउटपुट के रूप में दर्शाता है।
उसी प्रकार स्पीकर से हम तुरंत वह डेटा या गाना सुन लेते हैं जिसे हम कंप्यूटर के playlist से चुनते हैं।

आउटपुट डिवाइस की परिभाषा ( define of output device)

कम्प्यूटर में संग्रहित सूचना अथवा कम्प्यूटर की किसी भी प्रक्रिया के परिणाम को हम प्राप्त करते हैं, उन्हें आउटपुट डिवाइस ( output device ) कहते हैं । 
ये आउटपुट सामान्यता टेक्स्ट ग्राफिक्स , फोटो ऑडियो / विडियो के रूप में होते हैं ।  इस कार्य के लिए अब तक कई आउटपुट डिवाइसों का विकास हो चुका है , लेकिन फिर भी वीडियों मॉनीटर और प्रिन्टर सबसे अधिक प्रयोग में आने वाली आउटपुट डिवाइसें हैं ।
1 Monitor
2 Printer 
3 Plotter 
4 Head phone
5 Speaker 
6 Projector 

1. Monitor ( Video display unit ) 

 इसे विडियों विजुअल डिस्प्ले यूनिट ( वीडीयू ) भी कहते है । मॉनीटर कम्प्यूटर से प्राप्त परिणाम को सॉफ्ट कॉपी के रूप में दिखाता है । मॉनीटर तीन प्रकार के होते हैं ; मोनोक्रोम डिस्प्ले मॉनीटर , R.G.B और कलर डिस्प्ले मॉनीटर ।
Moniter

कुछ प्रमुख प्रयोग में आने वाले मॉनीटर निम्न है
 》कैथोड रे टयूब ( Cathode Ray Tube - CRT ) : -
 यह एक आयताकार बॉक्स की तरह दिखने वाला मॉनीटर होता है । इसे डेस्कटॉप कम्प्यूटर के साथ आउटपुट देखने के लिए प्रयोग करते हैं । यह आकार में बड़ा तथा भारी होता है । इसकी स्क्रीन में पीछे की तरफ फॉस्फोरस की एक परत लगाई जाती है । इसमें एक इलेक्ट्रॉन गन ( Electron Gun ) होती है । येे मुख्य रूप से television के लिए बनाए गए मगर ये monitor आज कल कम्प्युटर कम उपयोग मे लिए जातेे है।
》एलसीडी ( Liquid Crystal Display - LCD ) :-
 LCD एक प्रकार की अधिक प्रयोग में आने वाली आउटपुट डिवाइस है । यह CRT की अपेक्षा काफी हल्का किन्तु महँगा आउटपुट डिवाइस है । इसका प्रयोग लैपटॉप में , नोटबुक में , पर्सनल कम्प्यूटर में , डिजिटल घड़ियों आदि में किया जाता है । LCD में दो प्लेट होती हैं । इन प्लेटों के बीच में एक विशेष प्रकार का द्रव ( Liquid ) भरा जाता है । जब प्लेट के पीछे से पर निकलता है तो प्लेट्स के अन्दर के द्रव एलाइन होकर चमकते हैं , जिससे चित्र दिखाई देने लगता है । 
》 LED (Light Emitted Dioded ) :-
एक प्रकार की इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है।  यह एक Output device  है जिसका प्रयोग कंप्यूटर से प्राप्त output को देखने के लिए करते हैं।  यह आजकल घरों में टेलीविजन की तरह प्रयोग किया जाता है।  इसके अंदर छोटे - छोटे LED (Liauid |Emitted Diode) लगे हुए हैं।आजकल LEDs लाल , हरा और नीला प्रकाश उत्पन्न कर सकते हैं इन सभी रंगो के सहयोग से विभिन्न रंग के चित्र LED पर दिखाई देते हैं।

टीएफटी ( Thin - Film - Transistor - TFT ) 

TFT और एक्टिव मैट्रिक्स LCD ( amlcd ) एक प्रकार की आउटपुट डिवाइस है TFT में एक पिक्सल को कण्ट्रोल करने के लिए एक से चार ट्रांजिस्टर लगे होते हैं । ये ट्रांजिस्टर पैसिव मैट्रिक्स की अपेक्षा स्क्रीन को काफी तेज , चमकीला , ज्यादा कलरफुल बनाते हैं । इस आउटपुट डिवाइस की मुख्य बात ये है कि हम इसमें बने चित्र को विभिन्न Angles से भी देख सकते हैं । जबकि अन्य मॉनीटर में यदि विभिन्न कोणों Angles से चित्र देखने पर चित्र स्पष्ट दिखाई नहीं देते हैं TFT अन्य मॉनीटर्स की अपेक्षा महँगा , लेकिन काफी अच्छी क्वालिटी का चित्र डिस्प्ले ( Display ) करने वाला output device है ।

2. Printers 

 Printer एक प्रकार का output device होता है । इसका प्रयोग कम्प्यूटर से प्राप्त डेटा और सूचना को किसी कागज पर प्रिंट करने के लिए करते हैं । यह ब्लैक और वाइट के साथ - साथ कलर डॉक्यूमेंट को भी प्रिंट कर सकते है । किसी भी printer की क्वालिटी उसकी प्रिंटिग की क्वालिटी पर निर्भर करती है अर्थात् जितनी अच्छी प्रिंटिंग क्वालिटी होगी , Printer उतना ही अच्छा माना जाएगा । किसी printer की गति कैरेक्टर प्रति सेकण्ड ( Character per secound - CPS ) में , लाइन प्रति मिनट ( Line per minute - LPM ) में और मेजेज प्रति मिनट (Pages per minute-PPM) में मापी जाती है।
Output device

किसी printer की क्वालिटी डॉट्स प्रति इंच में मापी जाती है अर्थात् पेपर पर एक इंच में जितने ज्यादा - से - ज्यादा बिन्दु होंगे  प्रिंटिंग उतनी ही अच्छी होगी । प्रिंटर को दो  भागों में बाँटा गया है।
Impact Printer
Non-Impact Printer

●Impact Printer 

यह printer टाइपराइटर की तरह कार्य करता है । इसमें अक्षर छापने के लिए छोटे - छोटे पिन या हैमर्स का उपयोग होता हैं । इन पिनों पर अक्षर बने होते हैं । ये पिन स्याही से लगे हुए रिबन और उसके बाद पेपर पर प्रहार करते हैं , जिससे अक्षर पेपर पर छप जाते हैं । impact printer एक बार में एक कैरेक्टर या एक लाइन प्रिण्ट कर सकता है । इस प्रकार के printer  ज्यादा अच्छी क्वालिटी की प्रिंटिंग नहीं करते हैं । ये printer ओर printers की तुलना में सस्ते होते हैं और प्रिंटिंग के दौरान आवाज अधिक करते हैं , इसलिए इनका प्रयोग कम होता है।
Impact printer चार प्रकार के होते हैं -
1 Dot matrix printer
2 Daisy wheel printer
3 Line printer
4 Drum printer

● Non-Impact Printer 

ये printer कागज पर प्रहार नहीं करते , बल्कि अक्षर या चित्र प्रिट करने के लिए स्याही की फुहार कागज पर छोड़ते हैं । नॉन इम्पैक्ट printer प्रिंटिंग में  इंकजेट तकनीकी का प्रयोग करते हैं । इसके द्वारा उच्च क्वालिटी के ग्राफिक्स और अच्छे अक्षरों को छापता है । ये printer , impact printer से महँगे होते हैं , किन्तु इनकी छपाई Impact printer की अपेक्षा ज्यादा अच्छी होती है ।
Non-Impact Printer के प्रकार निम्न है-
1 Inkjet printer
2 Thermal printer
3 Laser printer
4 Elector magnetic printer
5 Elector static printer
प्रिंटर की अधिक जानकारी के लिए लिंक पर क्लिक करें ।

3. Plotter

Output device

प्लॉटर एक Output device है , जिसका प्रयोग बड़ी ड्राइंग या चित्र जैसे कि कंस्ट्रक्शन प्लान्स ( Construction Plans ) , मैकेनिकल वस्तुओं की ब्लूप्रिंट आदि के लिए करते हैं । इसमें ड्रॉइंग बनाने के लिए पेन , पेन्सिल , मार्कर आदि राइटिंग टूल का प्रयोग होता है । यह प्रिंटर की तरह होता है। इसके द्वारा छपाई अच्छी होती है , परन्तु ये बहुत धीमे होते हैं तथा मूल्य भी अपेक्षाकृत अधिक होता है । लेजर प्रिंटरों के आ जाने के बाद इनका प्रयोग लगभग समाप्त हो गया है ।
प्लॉटर की अधिक जानकारी के लिए लिंक पर क्लिक करें ।

4. Head Phones


Output device
Head Phones एक प्रकार की Output device है । जिसमें लाउड स्पीकर होते है तथा इसकी बनावट ऐसी होती है कि ये सिर पर बेल्ट की तरह पहना जा सकता है तथा दोनों स्पीकर मनुष्य के कान के ऊपर आ जाते हैं । इसलिए इसकी आवाज सिर्फ इसे पहनने वाला व्यक्ति ही सुन सकता है । किसी - किसी हैड फोन के साथ माइक भी लगा होता है , जिससे सुनने के साथ - साथ बात भी की जा सकती है । इस उपकरण का प्रयोग प्रायः टेलीफोन ऑपरेटरों , कॉल सेण्टर ऑपरेटरों , कमेण्टेटरों आदि द्वारा किया जाता है ।

5. Speaker

Output device
यह एक प्रकार का output device होता है।जो कम्प्यूटर से प्राप्त आउटपुट से प्राप्त आउटपुट को आवाज के रूप में  सुनाता है । यह कम्प्यूटर से डेटा विद्युत धारा के रूप में प्राप्त करता है । इसे सीपीयू से जोड़ने के लिए साउण्ड कार्ड की जरूरत पड़ती है । यही साउण्ड कार्ड साउण्ड उत्पन्न करता है । इसका प्रयोग गाने सुने मे करते हैं । कम्प्यूटर स्पीकर वह स्पीकर होता है जो कम्प्यूटर में आन्तरिक या बाह्य रूप से लगा होता है । 

6. Projector

Output device
 यह एक प्रकार का output device है , जिसका प्रयोग कम्प्यूटर से प्राप्त सूचना या डेटा को एक बड़ी स्क्रीन पर देखने के लिए करते हैं । इसकी सहायता से एक समय में बहुत सारे लोग एक समूह में बैठकर कोई परिणाम देख सकते हैं । इसका प्रयोग क्लास रूम ट्रेनिंग या एक बड़े कॉन्फ्रेन्स  हॉल जिसमें ज्यादा संख्या में दर्शक हों , जैसी जगहों पर किया जाता है । इसके द्वारा छोटे चित्रों को बड़ा करके सरलतापूर्वक देखा जा सकता है । यह एक प्रकार का अस्थायी output device है ।




Releted topic  

Tuesday, July 30, 2019

कंप्यूटर के इनपुट डिवाइस । Computer input device

Input device of computer (कम्प्युटर के इनपुट डिवाइस)


input device Input वो होते है जिससे  डाटा को कम्प्युटर में भेजा जाता है जैसे Keyboard हम Keyboard पर कुछ भी टाइप करते है फिर वो डाटा कंप्यूटर में जाता है और फिर आउटपुट मॉनिटर पर दिखाई देता है । मतलब की ऐसा उपकरण जो कम्प्युटर को निर्देश देता है और कम्प्यूटर उस निर्देश के अनुसार कार्य करता है ।
Input device kya hai ?
 वो हार्डवेयर हैं , जिसका उपयोग हमारे समझने योग्य शब्दों , ध्वनि , चित्र तथा क्रियाओं को उस रूप में अनुवाद करने के लिये किया जाता है , जिसे सिस्टम यूनिट प्रोसेस कर सके । जैसे , वर्ड प्रोसेसर का उपयोग करते समय कीबोर्ड से टेक्स्ट लिखते हैं तथा माउस से निर्देश देते हैं । की - बोर्ड और माउस के अलावा भी अनेक प्रकार के इनपुट डिवाइस होते हैं , जैसे - प्वाइंटिंग , स्कैनिंग , इमेज कैप्चरिंग और ऑडियो - इनपुट डिवाइस आदि ।

Input Device वे Device है जो हमारे अनुसार  दिये निर्देश को , सी.पी.यू. (C.P.U.) तक पहुचाते हैं।
input device picture

Input device definition in hindi ( इनपुट डिवाइस की परिभाषा )

वे सभी डिवाइस , जो कम्प्यूटर को डाटा एवं निर्देश देने के लिए उपयोग होते हैं , उन्हें इनपुट डिवाइस ( Input Devices ) कहते हैं । इलेक्ट्रॉनिक कम्प्यूटर आज अनिवार्य हो गया है , जिसका इस्तेमाल अब बाजारों , बैंकों, कारखानों , होटलों , अस्पतालों , राजकीय कार्यालयों , विद्यालयों आदि में व्यापक रूप से किया जा रहा है । ‘ कम्प्यूटर ' ' शब्द  मुख्य रूप में गणना करने वाली किसी भी मशीन के लिए प्रयुक्त किया जाता है । अब हम कम्प्यूटर्स को  गणितीय समस्याओं को हल करने के लिए महत्वपूर्ण सूचनायें उपलब्ध कराने मे डाटा प्रोसेसिंग डिवाइस के रूप में परिभाषित करते हैं । कम्प्यूटर की संरचना में स्विच , तार , ट्रांजिस्टर तथा आई . सी . ( Integrated Circuit ) आदि होते हैं ।

इनपुट डिवाइस के प्रकार ( types of input device )

● Keyboard 
● Mouse
● MICR
● OCR
● OMR
● Scanner 
● BCR
● Touch screen 
● Joystick
● Light Pen
● Voice input or Audio input
● Smart card reader 

Keyboard 

यह एक साधारण अंग्रेजी टाइपराइटर के की - बोर्ड जैसा होता है । इसमें रोमन लिपि के सभी अक्षर , अंक कुछ विशेष चिह्न , विराम चिह्न तथा दो शिफ्ट् कुंजीयाँ होती है । मुख्य की - बोर्ड लगभग सभी की - बोर्डो में एक जैसा ही होता है । keyboard में लगभग 108 Key होती हैं। जैसे कि Number Key, Alphabet key, Function Key, Editing key, Control key etc है। कि - बोर्ड के सबसे ऊपरी दाहिनी ओर तीन light देने वाले इन्डिकेटर लगे हुए होते हैं । ये Caps Lock , Num  Lock तथा Scroll Lock keys  स्थिति दिखाते रहते हैं । 
Input device picture keyboard

कम्प्यूटर के की - बोर्ड पर उपस्थित सभी keys को 6 समूहों में बाँटा जा सकता है । 

1 अंक कुजियाँ ( Number Keys ) -

ये कुंजियाँ संख्या में दस होती हैं तथा नीचे दिये गये अंक उन कत होते हैं । ये की - बोर्ड के मध्य भाग में ऊपर की ओर होती हैं ।
 0 1 2 3 4 5 6 7 8 9 

2 वर्ण कुजियाँ ( Alphabet Keys ) -

ये कुंजियाँ संख्या में 26 होती हैं तथा A से Z सभी वर्ण । एक - एक कुंजी पर अंकित होते हैं । ये कुंजियाँ कैपिटल एवं स्माल लेटर्स ( Capital & Small Letters ) दोनों ही प्रिंट करने के काम आती हैं । ये कुंजियाँ उसी क्रमानुसार में व्यवस्थित होती हैं जिस तरह टाइपराइटर पर होती हैं । 
QWERTYUTOPASDFGHJKLZXCYBNM | 

3 कार्य कुजियाँ ( Function Keys ) -

 ये कुंजियाँ संख्या में 12 होती हैं तथा इनके ऊपर F1 . F2 . F3 , . . . . . . . . . F12 अंकित होता है । अलग - अलग सॉफ्टवेयर्स में इन कुंजियों को अलग - अलग कार्य होता है । 
Fi , F2 , F3 , F4 , F5 , F6 , F7 , F8 , F9 , F10 , F11 , F12 

4 सम्पादन कुंजियाँ ( Editing Keys ) -

 ये कुंजियाँ संख्या में 13 होती हैं तथा इनका कार्य टाइप किये | गये मैटर को सम्पादित करना है । निम्नलिखित कुंजियाँ सम्पादन कुंजियाँ कहलाती है ।
Page up , page down , space  bar , delete , insert , tab

5 नियंत्रण कुंजियाँ ( Control Keys ) -

ये कुंजियाँ नियंत्रित करने के काम आती हैं ।
Enter , shift , Esc , pause

6 चिन्ह कजियाँ ( Symbols Kevs ) -

 इन कुंजियों का कोई कार्य नहीं होता है तथा यह सिर्फ विशेष चिन्ह प्रिंट करने के काम आती हैं ।

Mouse 

माउस एक प्वांइटिंग डिवाइस है । यह मॉनीटर पर दिखाई देने वाले प्वांइटर को नियंत्रित करता है । आमतौर पर माउस का प्वांइटर एक तीर के रूप में नजर आता है , जबकि एप्लीकेशन के आधार पर इसका आकार बदला जा सकता है । माउस में एक , दो या तीन बटन होते है । जिनके जरिए निर्देशों के विकल्पों चुना जाता है । माउस सामान्यतः तीन प्रकार के होते हैं ।
1 वायरलेस माउस ( Wireless Mouse ) मैकेनिकल
2 माउस ( Mechanical Mouse )
3 ऑप्टिकल माउस ( Optical Mouse )
Type of mouse
हम माउस के साथ कई प्रकार की क्रियाएं करते हैं > 
पॉइटिंग ( Pointing ) : - जब हम माउस को इधर - उधर खिसका कर माउस पॉइंटर को अपने डेस्कटॉप की किसी आइकॉन पर लाते हैं , तो इसे पॉइंट करना कहा जाता है ।
क्लिकिंग ( Clicking ) : - जब हम माउस पॉइंटर को किसी आइकॉन या प्रोग्राम पर लाकर माउस के बाएं बटन को एक बार दबाकर छोड़ देते हैं , तो उस क्रिया को क्लिक करना कहा जाता है । 
डबल - क्लिकिग ( Double - Clicking ) : - जब हम माउस के बाएं बटन से जल्दी - जल्दी दो बार क्लिक करते हैं , तो उस क्रिया को डबल - क्लिक करना कहा जाता है । 
राइट - क्लिकिंग ( Right Clicking ) : - जब हम माउस पॉइंटर को किसी आइकॉन या प्रोग्राम पर लाकर माउस के दाएं बटन को क्लिक करते है , तो इस क्रिया को राइट - क्लिक करना कहा जाता है । 
ड्रैगिग ( Dragging ) : - जब हम पॉइंटर को किसी आयकॉन पर लाकर माउस के बाएं बटन को दबाकर पकड़ लेते हैं और माउस बटन को दबाए रखकर ही माउस पॉइंटर को इधर - उधर सरकाते है , तो इस क्रिया को खींचना या डैग करना कहा जाता है ।

"माउस के सिग्नल को एक प्रोग्राम द्वारा प्रोसेस , किया जाता है । जिसे माउस ड्राइव कहते है ।"

मेग्नेटिक इंक कटेक्टर रीडर ( MICR )

इसका उपयोग सबसे अधिक बैंक में अधिकतर बैंक चेक , डिपॉजिट फॉर्म , बैंक , ड्राफ्ट आदि में किया जाता है । इन चैक डिपॉजिट फॉर्म ड्राफ्ट आदि में अक्षर लिखने के लिए एक विशेष प्रकार की मेग्नेटिक स्याही का उपयोग होता है । जिसे यह स्केन कर पढ़ सकता है । तथा सूचना कम्प्यूटर को दे सकता है । 
MICR

ऑप्टिकल कैरेक्टर टिकॉनिटान ( OCR )

यह ओ एम आर का ही कुछ सुधरा हुआ रूप होता है । यह केवल साधारण चिह्नों को नहीं , बल्कि छापे गए या हाथ से साफ - साफ लिखे गए अक्षरों को भी पढ़ लेता है । यह प्रकाश स्रोत की सहायता से कैरेक्टर की शेप को पहचान लेता है । इस तकनीक को ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकॉग्नीशन कहा जाता है । इसका उपयोग पुराने दस्तावेजों को पढ़ने के लिए किया जाता है ।

ऑप्टिकल मार्क रीडर ( OMR )

ऑप्टिकल मार्क रीडर एक प्रकार की इनपुट डिवाइस है , जिसका प्रयोग किसी कागज पर पैन या पेन्सिल के निशानों को जाँचती है इसमें चिन्हित कागज पर जब प्रकाश डाला जाता है तो प्रकाश परिवर्तित होकर उस जाँचे गये चिन्ह को दर्शाता है । यह तकनीक केवल छपे कार्ड या फॉर्म पर उपस्थित निश्चित स्थानों पर बने डिब्बो एवं पेन्सिल से भरे डिब्बों को जाँचती है । सामान्यतः इसका उपयोग प्रतियोगिता परीक्षा के आन्सर शीट को चेक करने में किया जाता है ।
कंप्यूटर के इनपुट डिवाइस

स्कैनर

स्कैनर एक प्रकार की इनपुट डिवाइस है यह सूचना को प्रत्यक्ष रूप से कम्प्यूटर में भेजने की क्षमता रखता है यह शीघ्र एवं बिल्कुल ठीक रूप से डाटा एन्ट्री का कार्य करता है । इस डिवाइस का उपयोग सूचना जैसे फोटोग्राफ एवं पेपर पर डाक्यूमेंट को केप्चर करने तथा कम्प्यूटर इमेज में अनुवाद करने के लिए किया जाता है।
स्कैनिंग डिवाइस तीन प्रकार के होते हैं 
कंप्यूटर के इनपुट डिवाइस
हैण्ड हेल्ड स्कैनर ( Hand Held Scanner ) : - ये आकार में काफी छोटे और हल्के होते हैं , जिन्हें आसानी से । हाथ पर रखकर भी डॉक्यूमेंट को स्कैन किया जा सकता है । यदि किसी डॉक्यूमेंट को स्कैन करना हो तो डॉक्यूमेंट के अलग - अलग भागों को स्कैन करना पड़ता है । लेकिन आकार में छोटा और हल्का होना इसका एक महत्त्वपूर्ण फायदा है । 
फ्लैटबेड स्कैनर्स ( Flatbed Scanners ) : - ये काफी बड़े और महँगे स्कैनर होते हैं तथा उच्च गुणवत्ता के चित्र उत्पन्न करते हैं । इसमें एक समतल पटल ( Flat Sur face ) होता है जिस पर डॉक्यूमेंट को रखकर स्कैन किया जाता है । यह बिल्कुल उसी तरह कार्य करता है जिस तरह फोटोकॉपी मशीन पर पेज रखकर फोटोकॉपी करते हैं । यह एक बार में पूरा एक पेज स्कैन करता है । ड्रम स्कैनर ( Drum Scanner ) : - ये मध्यम आकार के स्कैनर होते हैं । इनमें एक घूमने वाला ड्रम होता है । पेपर या शीट को स्कैनर में इनपुट देते हैं और स्कैनर में लगा डम पूरे पेज पर घूमता है , जिससे पूरा पेज स्कैन हो जाता है । यह बिल्कुल फैक्स मशीन की तरह कार्य करता है ।

बार कोड रीडर ( Bar Code Reader )

यदि आपको किसी सुपर मार्केट या डिपार्टमेंटल स्टोर से खरीददारी करने का मौका मिला हो तो आपने देखा होगा । कि जब हम सभी सामान लेकर , काउन्टर पर भुगतान के लिए आते हैं तो वहां बैठा कम्प्यूटर ऑपरेटर हमारे सामानों में से एक - एक करके सामान उठाता है तथा उसके किसी क्षेत्र पर एक मशीन रखकर पुनः हमारा सामान रख देता है तथा इस प्रकार वह सभी सामान के साथ करता है । वास्तव में उसके हाथ में जो मशीन होती है , उसे बार कोड रीडर कहते हैं तथा उसकी सहायता से वह प्रत्येक सामान पर लगे बार कोड को पढ़कर उसकी कीमत को कम्प्यूटर में इनपुट करता है । भारत में इस प्रकार के कोड का प्रचलन नया जरूर है लेकिन विश्व के कई विकसित देशों में यह एक आम प्रचलन है ।
 बार कोड कुछ अलग - अलग मोटाई की विभिन्न लाइनें हैं जो कि सामान की कोड संख्या अथवा उसकी कीमत को निरूपित करती हैं । जिस कोडिंग पद्धति का प्रयोग बार कोड में किया जाता है , उसे यूनिवर्सल प्रोड्क्ट कोड ( Universal Product - UPC ) कहा जाता हैै।
यूनिवर्सल प्रोड्क्ट कोड ( Universal Product - UPC )
 जिन मशीनों की सहायता से इन बार कोड को पढ़ा जाता है , उन्हें बार कोड रीडर ( Bar Code Reader ) या स्कैनर ( Scanner ) कहते हैं । ये बार कोड रीडर दो आकारों में होते हैं । छोटे आकार का ( Handy Scanner ) जिसे उठाकर ऑपरेटर सामान पर लगे बार कोड पर रखकर , स्कैनर के ऊपर लगे बटन को दबाता है। दूसरा बार कोड रीडर आकार में बड़ा होता है जो कि पर स्थाई रूप से लगा होता है ।

टच स्क्रीन ( Touch Screen ) 

टच स्क्रीन एक विशेष प्रकार का मॉनिटर होता है । जो कि किसी भी प्रकार के स्पर्श के प्रति संवेदनशील होता है । 1984 में हेवलेट पैकॉर्ड ( Hewlett Packard ) कम्पनी द्वारा विकसित की गई इस विशेष स्क्रीन को सीमित मात्रा में डाटा तथा इनपुट करने के लिए प्रयोग में लिया जाता है । एक तरीके की टच स्क्रीन होती  हैं। इसके साथ की - बोर्ड के द्वारा डेटा कम्प्यूटर में गहण किया जाता है । अथवा उंगलियों के माध्यम से स्क्रीन को टन छूने पर डाटा कम्प्यूटर द्वारा ग्रहण कर लिया जाता है।

टच स्क्रीन ( Touch Screen )

जॉयस्टिक ( Joystick ) :-

 यह भी कम्प्यूटर से सम्बन्धित एक इनपुट डिवाइस है जो कि सामान्यतः कम्प्यूटर पर गेम खेलने के काम आता है । यह एक लम्बा सा लीवर या छड है , जो कि एक गेंद की सहायता से अपने आधार से जुड़ी होती है । इस लीवर को पकड़ कर जिस दिशा में घुमाया जाता है , स्क्रीन पर पॉइन्टर उस दिशा में घूम जाता है ।
कंप्यूटर के इनपुट डिवाइस । Input device

लाइट पेन ( Light Pen ) 

माउस , जॉयस्टिक आदि की भाँति लाइट पेन भी एक पॉइन्टिंग इनपुट डिवाइस है । स्क्रीन पर उपस्थित विभिन्न सूचनाओं को चुनने तथा स्क्रीन पर ही चित्र बनाने के लिए लाइट पेन का प्रयोग किया जाता है । एक रोशनी ( Light ) संवेदी डॉयोड इस  पेन के विब के स्थान पर लगा होता है । जब पेन को स्क्रीन के पास ले जाया जाता  है तो निब मॉनिटर की रोशनी को महसूस करता है तथा जिस स्थान पर भी इस पेन को रखा जाता है वहा पर सूूचना के संकेत को CPU को भेेेे जाता है।

Voice input or Audio input ( Microphone ) 

माइक्राफोन एक प्रकार का इनपुट डिवाइस है , जिसका प्रयोग कम्प्यूटर को साउण्ड के रूप में इनपुट देने के लिए किया जाता है। माइक्रोफोन आवाज को प्राप्त करता है तथा उसे कम्प्यूटर के फॉर्मेट में परिवर्तित करता है , जिसे डिजिटाइज्ड साउण्ड या डिजिटल ऑडियो भी कहते हैं ।

Smart card reader 

स्मार्ट कार्ड रीडर एक डिवाइस है , जिसका प्रयोग किसी स्मार्ट कार्ड के माइक्रोप्रोसेसर को एक्सेस करने के लिए किया जाता है । स्मार्ट कार्ड दो प्रकार के होते हैं । 
( i ) मैमोरी कार्ड ( ii ) माइक्रोप्रोसेसर कार्ड 
 मैमोरी कार्ड में नॉन - वॉलेटाइल मैमोरी स्टोरेज कम्पोनेण्ट होता है जो डेटा को स्टोर करता है । माइक्रोप्रोसेसर कार्ड में वॉलेटाइल मैमोरी और माइक्रोप्रोसेसर कम्पोनेण्ट्स दोनों होते हैं । कार्ड सामान्यत : प्लास्टिक से बना होता है । स्मार्ट कार्ड का प्रयोग बड़ी कम्पनियों और संगठनों से सुरक्षा के उद्देश्य से किया जाता है ।




कम्प्युटर कीबोर्ड क्या है और कीबोर्ड के प्रकार

कम्प्युटर कीबोर्ड क्या है ( keyboard in hindi ) की - बोर्ड लगभग टाइपराइटर के सामान ही होता है , फर्क सिर्फ इतना है कि टाइपराइटर में लगे ...